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Tuesday, 29 September 2020

मेरी पत्नी मेरा गर्व हो तुम

तू दम्भ मेरा, सम्मान मेरा
तू शक्ति तो मै शिव हुआ
बिन तेरे मै शव रह ही जाता ।
हे प्राणप्रिये जीवन साथी
तू कल्याणी ,आधार मेरा
तू श्री है तो मै श्रीपति हुआ
बिन तेरे मै श्रीहीन ही रह जाता।
हे प्राणप्रिये जीवन साथी
तू स्वर है, तू संगीत मेरा। तू ज्ञान है मै ज्ञानी हुआ
बिन तेरे मै अज्ञात ही रह जाता ।
हे प्राणप्रिये जीवन साथी
तू उत्सव है ,उल्लास मेरा
तू सावन तो मै बसंत हुआ
बिन तेरे मै पतझड ही रह जाता ।
हे प्राणप्रिये जीवन साथी
है आज मेरा मन गर्वित तुमसे
तू सम्मान है ,अभिमान मेरा
कहता हूँ आज तुझसे प्रिये
मेरी पत्नी मेरा गर्व हो तुम ।।

Thursday, 1 May 2014

सुपरहिट फिल्मों की सिली गलतियां

कभी सोचा है आपने कि आपकी पसंदीदा फिल्मों में भी 
कितनी छोटी-छोटी बेवकूफियां की गई हैं। 
पढ़िए कुछ सुपरहिट फिल्मों की सिली गलतियां।
रा-वन -
फिल्म में शाहरुख दक्षिण भारतीय बने हैं, लेकिन जब उनकी मौत होती है तो उन्हें
क्रिश्चियन परंपरा के अनुसार दफनाया जाता है, लेकिन बाद में हम देखते हैं
कि उनकी अस्थियां पानी में बहाई जा रही हैं।
हां भई सभी को खुश रखना पड़ता है न!

अमर अकबर एंथोनी -
तीन लोग एक साथ एक ही महिला के लिए रक्तदान कर रहे हैं। अरे भई साइंस इमोशन से बढ़कर थोड़े ही है!

लगान -
यह फिल्म 18वीं सदी की कहानी है और उस वक्त एक ओवर
में 8 बॉल हुआ करती थीं। लेकिन फिल्म में एक ओवर में 6 गेंदें
दिखाई गई हैं। शायद 8 गेंद में फिल्म और
भी लंबी हो जाती। है न!

बागबान -
अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी होली के तुरंत
बाद 6 महीनों के लिए अलग हो जाते हैं यानी मार्च से लेकर
सितंबर तक के लिए। लेकिन इन्हीं 6 महीनों में वे वेलेंटाइन-डे
मना लेते हैं, जो कि फरवरी में आता है और करवाचौथ मनाते
हैं, जो अक्सर अक्टूबर में पड़ती है।
क्या करें टाइम कम था इमोशन ज्यादा!

कृष -
फिल्म में ऋतिक दो साल के लिए विदेश जाते हैं, लेकिन
इसी दौरान प्रीति प्रेग्नेंट हो जाती हैं।
इस पर भईया नो कमेंट!

प्यार तो होना ही था -
काजोल पब्लिक टॉयलेट यूज करने के लिए ट्रेन से एक स्टेशन
पर उतरती हैं और उनकी ट्रेन छूट जाती है। बेचारी को शायद
पता नहीं होगा कि ट्रेन के हर कंपार्टमेंट में चार टॉयलेट
होते हैं!
  

शेरो शायरी -रविकान्त साहू (JAVA KING)

गुजरी हुई जिंदगी को कभी याद न कर, 
तकदीर मे जो लिखा है उसकी फ़रियाद न कर|
जो होना है वो तो होकर ही रहेगा,
तू कल की फिकर मे अपनी आज को बर्बाद न कर||

हँस मरते हुये भी गाता है,
और मोर नाचते हुये भी रोता है|
ये जिंदगी का फंडा है भाई, 
दुखों वाली रात नींद नही आती और खुशी वाली रात कौन सोता है|| 
इन आँखों को बस एक झलक दिखला कर,
यूँ पल भर में ही तुम, क्यूँ दूर चले जाते हो|
अब तो शायद ही मुझसे मोहब्बत करे कोई, 
मेरी आँखों में तुम साफ़ नज़र आते हो ||

तुम यूँ ही मुस्कुराती रहो सदा, क्या इतना कम है?
तेरी खुशियों में शामिल नहीं मैं, बस यही एक गम है|

मैं तो बस तेरी एक झलक का तलबगार था,
मुझे क्या पता मै इतना बड़ा गुनेहगार था|
मैं तो खड़ा था आज भी तेरी राह में,
मुझ पर इश्क का जूनून कुछ इस कदर सवार था||

भूल कर भी तुम्हें भूल ना पायेंगे, सारी उम्र हम यूँ ही अश्क बहायेंगे|
मिलेंगे जब कभी अगले जन्म में, हाल-ए-दिल, तुमको सुनायेंगे||

लोग कहते हैं, इश्क इतना ना करो कि हुस्न सर पे सवार हो जाये|
मैं कहता हूँ, इश्क ऐसा करो कि पत्थर दिल को भी प्यार हो जाये||
एक झलक दिखला कर क्यूँ दूर चले जाते हो?
अपने चाहने वाले को, तुम क्यूँ ऐसे तडपाते हो?
मर जाएंगे ऐ सनम, हम तुम्हारी याद में,
तब लोगे तुम नाम मेरा, अपनी हर फ़रियाद में||

जो तुमको हो पसंद वही बात करेंगे,
तुम दिन को अगर रात कहो, रात कहेंगे|
जो तुमको हो पसंद....वही बात करेंगे|

"मेरे दिल की आवाज़ हो जाती है दफ़न, लड़ते हुए दिमागी तूफानों से |
जैसे सागर की लहरें तोडती हैं दम, साहिल पर टकरा कर चट्टानों से ||"

चाह कर भी कह ना पाए, मुझे जो था तुमसे कहना,
नसीब मेरा है मुझसे खफा, जो दूर है तुमसे रहना| 
रब ने दिया है दर्द मुझे, अब इश्क में उसे है सहना,
होंठों से तो कह ना पाए, अब आँखों से ही है कहना||

कोशिश करने वालों की (Koshish Karne Waalon Ki) - हरिवंश राय 'बच्चन'

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है,
चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है,
चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
आख़िर उसकी मेहनत बेकार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है,
जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है।
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में,
बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में।
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,
क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम,
संघर्ष का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती,
कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।

सप्ताह का विचार


                                                         
  • एकता का किला सबसे सुरक्षित होता है। न वह टूटता है और न उसमें रहने वाला कभी दुखी होता है।
    - अज्ञात
  • किताबें ऐसी शिक्षक हैं जो बिना कष्ट दिए, बिना आलोचना किए और बिना परीक्षा लिए हमें शिक्षा देती हैं।
    - अज्ञात
  • ऐसे देश को छोड़ देना चाहिए जहाँ न आदर है, न जीविका, न मित्र, न परिवार और न ही ज्ञान की आशा।
    - विनोबा
  • विश्वास वह पक्षी है जो प्रभात के पूर्व अंधकार में ही प्रकाश का अनुभव करता है और गाने लगता है।
    - रवींद्रनाथ ठाकुर
  • कुल की प्रतिष्ठा भी विनम्रता और सदव्यवहार से होती है, हेकड़ी और रुआब दिखाने से नहीं।
    - प्रेमचंद
  • अनुभव की पाठशाला में जो पाठ सीखे जाते हैं, वे पुस्तकों और विश्वविद्यालयों में नहीं मिलते।
    - अज्ञात
  • जिस प्रकार थोड़ी-सी वायु से आग भड़क उठती है, उसी प्रकार थोड़ी-सी मेहनत से किस्मत चमक उठती है।
    - अज्ञात
  • अपने को संकट में डाल कर कार्य संपन्न करने वालों की विजय होती है, कायरों की नहीं।
    - जवाहरलाल नेहरू
  • सच्चाई से जिसका मन भरा है, वह विद्वान न होने पर भी बहुत देश सेवा कर सकता है।
    - पं. मोतीलाल नेहरू
  • स्वतंत्र वही हो सकता है जो अपना काम अपने आप कर लेता है।
    - विनोबा
  • जिस तरह रंग सादगी को निखार देते हैं उसी तरह सादगी भी रंगों को निखार देती है। सहयोग सफलता का सर्वश्रेष्ठ उपाय है।
    - मुक्ता
  • दुख और वेदना के अथाह सागर वाले इस संसार में प्रेम की अत्यधिक आवश्यकता है।
    - डॉ. रामकुमार वर्मा
  • डूबते को तारना ही अच्छे इंसान का कर्तव्य होता है।
    - अज्ञात
  • सबसे अधिक ज्ञानी वही है जो अपनी कमियों को समझकर उनका सुधार कर सकता हो।
    - अज्ञात
  • अनुभव-प्राप्ति के लिए काफ़ी मूल्य चुकाना पड़ सकता है पर उससे जो शिक्षा मिलती है वह और कहीं नहीं मिलती।
    - अज्ञात
  • जिसने अकेले रह कर अकेलेपन को जीता उसने सबकुछ जीता।
    - अज्ञात
  • अच्छी योजना बनाना बुद्धिमानी का काम है पर उसको ठीक से पूरा करना धैर्य और परिश्रम का।
    - कहावत
  • जो पुरुषार्थ नहीं करते उन्हें धन, मित्र, ऐश्वर्य, सुख, स्वास्थ्य, शांति और संतोष प्राप्त नहीं होते।
    - वेदव्यास
  • नियम के बिना और अभिमान के साथ किया गया तप व्यर्थ ही होता है।
    - वेदव्यास
  • जैसे सूर्योदय के होते ही अंधकार दूर हो जाता है वैसे ही मन की प्रसन्नता से सारी बाधाएँ शांत हो जाती हैं।
    - अमृतलाल नागर
  • जैसे उल्लू को सूर्य नहीं दिखाई देता वैसे ही दुष्ट को सौजन्य दिखाई नहीं देता।
    - स्वामी भजनानंद
  • लोहा गरम भले ही हो जाए पर हथौड़ा तो ठंडा रह कर ही काम कर सकता है।
    - सरदार पटेल
  • एकता का किला सबसे सुदृढ़ होता है। उसके भीतर रह कर कोई भी प्राणी असुरक्षा अनुभव नहीं करता।
    - अज्ञात
  • फूल चुन कर एकत्र करने के लिए मत ठहरो। आगे बढ़े चलो, तुम्हारे पथ में फूल निरंतर खिलते रहेंगे।
    - रवींद्रनाथ ठाकुर
  • सौभाग्य वीर से डरता है और कायर को डराता है।
    - अज्ञात
  • प्रकृति अपरिमित ज्ञान का भंडार है, परंतु उससे लाभ उठाने के लिए अनुभव आवश्यक है।
    - हरिऔध
  • प्रकृति अपरिमित ज्ञान का भंडार है, पत्ते-पत्ते में शिक्षापूर्ण पाठ हैं, परंतु उससे लाभ उठाने के लिए अनुभव आवश्यक है।
    - हरिऔध
  • जिस मनुष्य में आत्मविश्वास नहीं है वह शक्तिमान हो कर भी कायर है और पंडित होकर भी मूर्ख है।
    - राम प्रताप त्रिपाठी
  • मन एक भीरु शत्रु है जो सदैव पीठ के पीछे से वार करता है।
    - प्रेमचंद
  • असत्य फूस के ढेर की तरह है। सत्य की एक चिनगारी भी उसे भस्म कर देती है।
    - हरिभाऊ उपाध्याय
  • समय परिवर्तन का धन है। परंतु घड़ी उसे केवल परिवर्तन के रूप में दिखाती है, धन के रूप में नहीं।
    - रवींद्रनाथ ठाकुर
  • संतोष का वृक्ष कड़वा है लेकिन इस पर लगने वाला फल मीठा होता है।
    - स्वामी शिवानंद
  • विचारकों को जो चीज़ आज स्पष्ट दीखती है दुनिया उस पर कल अमल करती है।
    - विनोबा
  • विश्वविद्यालय महापुरुषों के निर्माण के कारख़ाने हैं और अध्यापक उन्हें बनाने वाले कारीगर हैं।
    - रवींद्र
  • हज़ार योद्धाओं पर विजय पाना आसान है, लेकिन जो अपने ऊपर विजय पाता है वही सच्चा विजयी है।
    - गौतम बुद्ध
  • जबतक भारत का राजकाज अपनी भाषा में नहीं चलेगा तबतक हम यह नहीं कह सकते कि देश में स्वराज है।
    - मोरारजी देसाई
  • मुठ्ठी भर संकल्पवान लोग जिनकी अपने लक्ष्य में दृढ़ आस्था है, इतिहास की धारा को बदल सकते हैं।
    - महात्मा गांधी
  • सत्याग्रह बलप्रयोग के विपरीत होता है। हिंसा के संपूर्ण त्याग में ही सत्याग्रह की कल्पना की गई है।
    - महात्मा गांधी
  • दूसरों पर किए गए व्यंग्य पर हम हँसते हैं पर अपने ऊपर किए गए व्यंग्य पर रोना तक भूल जाते हैं।
    - रामचंद्र शुक्ल
  • धन उत्तम कर्मों से उत्पन्न होता है, प्रगल्भता (साहस, योग्यता व दृढ़ निश्चय) से बढ़ता है, चतुराई से फलता फूलता है और संयम से सुरक्षित होता है।
    - विदुर
  • वाणी चाँदी है, मौन सोना है, वाणी पार्थिव है पर मौन दिव्य।
    - कहावत
  • मुहब्बत त्याग की माँ है। वह जहाँ जाती है अपने बेटे को साथ ले जाती है।
    - सुदर्शन
  • मुस्कान थके हुए के लिए विश्राम है, उदास के लिए दिन का प्रकाश है तथा कष्ट के लिए प्रकृति का सर्वोत्तम उपहार है।
    - अज्ञात
  • जिस तरह घोंसला सोती हुई चिड़िया को आश्रय देता है उसी तरह मौन तुम्हारी वाणी को आश्रय देता है।
    - रवींद्रनाथ ठाकुर
  • साफ़ सुथरे सादे परिधान में ऐसा यौवन होता है जिसमें अधिक उम्र छिप जाती है।
    - अज्ञात
  • ज्ञानी जन विवेक से सीखते हैं, साधारण मनुष्य अनुभव से, अज्ञानी पुरुष आवश्यकता से और पशु स्वभाव से।
    - कौटिल्य
  • जो काम घड़ों जल से नहीं होता उसे दवा के दो घूँट कर देते हैं और जो काम तलवार से नहीं होता वह काँटा कर देता है।
    - सुदर्शन

Wednesday, 25 September 2013

रात आधी खींच कर मेरी हथेली......





 रात आधी खींच कर मेरी हथेली
एक उंगली से लिखा था प्यार तुमने।

फ़ासला था कुछ हमारे बिस्तरों में
और चारों ओर दुनिया सो रही थी।
तारिकाऐं ही गगन की जानती हैं
जो दशा दिल की तुम्हारे हो रही थी।
मैं तुम्हारे पास होकर दूर तुमसे
अधजगा सा और अधसोया हुआ सा।
रात आधी खींच कर मेरी हथेली
एक उंगली से लिखा था प्यार तुमने।

एक बिजली छू गई सहसा जगा मैं
कृष्णपक्षी चाँद निकला था गगन में।
इस तरह करवट पड़ी थी तुम कि आँसू
बह रहे थे इस नयन से उस नयन में।
मैं लगा दूँ आग इस संसार में
है प्यार जिसमें इस तरह असमर्थ कातर।
जानती हो उस समय क्या कर गुज़रने
के लिए था कर दिया तैयार तुमने!
रात आधी खींच कर मेरी हथेली
एक उंगली से लिखा था प्यार तुमने।

प्रात ही की ओर को है रात चलती
औ उजाले में अंधेरा डूब जाता।
मंच ही पूरा बदलता कौन ऐसी
खूबियों के साथ परदे को उठाता।
एक चेहरा सा लगा तुमने लिया था
और मैंने था उतारा एक चेहरा।
वो निशा का स्वप्न मेरा था कि अपने
पर ग़ज़ब का था किया अधिकार तुमने।
रात आधी खींच कर मेरी हथेली
एक उंगली से लिखा था प्यार तुमने।

और उतने फ़ासले पर आज तक
सौ यत्न करके भी न आये फिर कभी हम।
फिर न आया वक्त वैसा
फिर न मौका उस तरह का
फिर न लौटा चाँद निर्मम।
और अपनी वेदना मैं क्या बताऊँ।
क्या नहीं ये पंक्तियाँ खुद बोलती हैं?
बुझ नहीं पाया अभी तक उस समय जो
रख दिया था हाथ पर अंगार तुमने।
रात आधी खींच कर मेरी हथेली

Sunday, 25 August 2013

राजनीति....




अब नेता जी वोट मांगने के लिये
जनता के पास नही जायेंगे
फिर भी इलैक्शन जीत जायेंगे
यह सौ प्रतिशत सच का दावा है
अभी-अभी एक तांत्रिक ने
सौ मुर्गें और पच्चीस बकरे मांगा है
साथ मे मादिरा भी जायेंगी
जैसे जैसे मुर्गे और बकरों की बलि देगा
नेता जी के पक्ष मे वोटो पर असर पडेंगा
जब पूर्ण आहुति का होगा भोग
सबल हो जायेगा जीत का योग
तांत्रिक के जाप और बलि क प्रभाव
पहले भी कई नेता/अभिनेता
देख चुके है जनाब
तांत्रिक का भयंकर प्रभाव और कर्मकांड है
अब तो विदेशो तक मे भरी मांग है
तभी किसी ने व्यंग से बीच मे टोका
जीत के लिये मूक पशुओं का बलिदान
याद रखेगा २१वीं सदी का हिन्दुस्तान
विज्ञान के सीने पर फिर तांत्रिक ने गोला दागा था
यह तांत्रिक तो वही है जो
कत्ल और डकैती के इल्जाम में
पच्चीस साल पहले जेल से भागा था
आज नेता जी उसके चरण छू रहे है
ढोंगी, आधुनिक युग में जनता तो जनता
नेता तक को दूह रहे हैं
न्याय ओर कानून का रास्ता भी
आम आदमी के घर की चौखट तक जाता है
वी०आई०पी० नेता अभिनेता
आसानी से हाथ नही आता है
यह देश सिद्यांतो के सहारे नही
अदृश्य शक्ति के सहारे चल रहा है
क्योकिं हर नेता अपने आप को सुरक्षित और
कनून से ऊपर समझ रहा है
यदि फंसा तो जेल नही
अस्पताल जाता है
चीख चीख कर खुद को
बेकसूर बताता है
लोकतंत्र की हड्डियों, खाल और मांस
खुले आम बेच रहे है
हम सब भय से कांपते हूए
रोज चुप चाप देख रहे है....