गुजरी हुई जिंदगी को कभी याद न कर,
तकदीर मे जो लिखा है उसकी फ़रियाद न कर|
जो होना है वो तो होकर ही रहेगा,
तू कल की फिकर मे अपनी आज को बर्बाद न कर||
हँस मरते हुये भी गाता है,
और मोर नाचते हुये भी रोता है|
ये जिंदगी का फंडा है भाई,
दुखों वाली रात नींद नही आती और खुशी वाली रात कौन सोता है||
इन आँखों को बस एक झलक दिखला कर,
यूँ पल भर में ही तुम, क्यूँ दूर चले जाते हो|
अब तो शायद ही मुझसे मोहब्बत करे कोई,
मेरी आँखों में तुम साफ़ नज़र आते हो ||
तुम यूँ ही मुस्कुराती रहो सदा, क्या इतना कम है?
तेरी खुशियों में शामिल नहीं मैं, बस यही एक गम है|
मैं तो बस तेरी एक झलक का तलबगार था,
मुझे क्या पता मै इतना बड़ा गुनेहगार था|
मैं तो खड़ा था आज भी तेरी राह में,
मुझ पर इश्क का जूनून कुछ इस कदर सवार था||
भूल कर भी तुम्हें भूल ना पायेंगे, सारी उम्र हम यूँ ही अश्क बहायेंगे|
मिलेंगे जब कभी अगले जन्म में, हाल-ए-दिल, तुमको सुनायेंगे||
लोग कहते हैं, इश्क इतना ना करो कि हुस्न सर पे सवार हो जाये|
मैं कहता हूँ, इश्क ऐसा करो कि पत्थर दिल को भी प्यार हो जाये||
एक झलक दिखला कर क्यूँ दूर चले जाते हो?
अपने चाहने वाले को, तुम क्यूँ ऐसे तडपाते हो?
मर जाएंगे ऐ सनम, हम तुम्हारी याद में,
तब लोगे तुम नाम मेरा, अपनी हर फ़रियाद में||
जो तुमको हो पसंद वही बात करेंगे,
तुम दिन को अगर रात कहो, रात कहेंगे|
जो तुमको हो पसंद....वही बात करेंगे|
"मेरे दिल की आवाज़ हो जाती है दफ़न, लड़ते हुए दिमागी तूफानों से |
जैसे सागर की लहरें तोडती हैं दम, साहिल पर टकरा कर चट्टानों से ||"
चाह कर भी कह ना पाए, मुझे जो था तुमसे कहना,
नसीब मेरा है मुझसे खफा, जो दूर है तुमसे रहना|
रब ने दिया है दर्द मुझे, अब इश्क में उसे है सहना,
होंठों से तो कह ना पाए, अब आँखों से ही है कहना||
तकदीर मे जो लिखा है उसकी फ़रियाद न कर|
जो होना है वो तो होकर ही रहेगा,
तू कल की फिकर मे अपनी आज को बर्बाद न कर||
हँस मरते हुये भी गाता है,
और मोर नाचते हुये भी रोता है|
ये जिंदगी का फंडा है भाई,
दुखों वाली रात नींद नही आती और खुशी वाली रात कौन सोता है||
इन आँखों को बस एक झलक दिखला कर,
यूँ पल भर में ही तुम, क्यूँ दूर चले जाते हो|
अब तो शायद ही मुझसे मोहब्बत करे कोई,
मेरी आँखों में तुम साफ़ नज़र आते हो ||
तुम यूँ ही मुस्कुराती रहो सदा, क्या इतना कम है?
तेरी खुशियों में शामिल नहीं मैं, बस यही एक गम है|
मैं तो बस तेरी एक झलक का तलबगार था,
मुझे क्या पता मै इतना बड़ा गुनेहगार था|
मैं तो खड़ा था आज भी तेरी राह में,
मुझ पर इश्क का जूनून कुछ इस कदर सवार था||
भूल कर भी तुम्हें भूल ना पायेंगे, सारी उम्र हम यूँ ही अश्क बहायेंगे|
मिलेंगे जब कभी अगले जन्म में, हाल-ए-दिल, तुमको सुनायेंगे||
लोग कहते हैं, इश्क इतना ना करो कि हुस्न सर पे सवार हो जाये|
मैं कहता हूँ, इश्क ऐसा करो कि पत्थर दिल को भी प्यार हो जाये||
एक झलक दिखला कर क्यूँ दूर चले जाते हो?
अपने चाहने वाले को, तुम क्यूँ ऐसे तडपाते हो?
मर जाएंगे ऐ सनम, हम तुम्हारी याद में,
तब लोगे तुम नाम मेरा, अपनी हर फ़रियाद में||
जो तुमको हो पसंद वही बात करेंगे,
तुम दिन को अगर रात कहो, रात कहेंगे|
जो तुमको हो पसंद....वही बात करेंगे|
"मेरे दिल की आवाज़ हो जाती है दफ़न, लड़ते हुए दिमागी तूफानों से |
जैसे सागर की लहरें तोडती हैं दम, साहिल पर टकरा कर चट्टानों से ||"
चाह कर भी कह ना पाए, मुझे जो था तुमसे कहना,
नसीब मेरा है मुझसे खफा, जो दूर है तुमसे रहना|
रब ने दिया है दर्द मुझे, अब इश्क में उसे है सहना,
होंठों से तो कह ना पाए, अब आँखों से ही है कहना||

No comments:
Post a Comment