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Thursday, 3 May 2012

आइना देखूं तो सच का चेहरा नज़र आता है.....

आइना देखूं तो सच का चेहरा नज़र आता है ,
मुस्कुराता चेहरा भी बेज़ार नज़र आता है .

जब भी देखूं इन डूबी हुई सी आँखों को ,
इनमे टुटा हुआ एक ख्वाब नज़र आता है .

जब भी देखूं इन खामोश बंद होंठों को ,
दबा हुआ कोई सवाल नज़र आता है .

आईने को ही हमराज़ बना लो यारों ,
इससे बेहतर न कोई यार नज़र आता है .

तू जो तड़पे तो मुस्कुरा के मुह फेर न ले , 
चुप रहकर भी करे बात नज़र आता है .

आइना है जो तुझे तुझसे मिला सकता है ,
तेरा हर रूप आईने में नज़र आता है .

इसके आगे तू मुस्कुरा ले चाहें कितना भी , 
दिल में जो दर्द छुपा है वो नज़र आता है .

आइना दिल नहीं जो टूट कर बिखर जाये ,
ये जो टूटे तो एक हथियार नज़र आता है .

आइना देखूं तो सच का चेहरा नज़र आता है ,
मुस्कुराता चेहरा भी बेज़ार नज़र आता है .



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